भुवनेश्वर महादेव मंदिर: उत्तर गुजरात में आध्यात्मिक पर्यटन की नई पहचान

Updated:3 months, 3 weeks ago

गुजरात के अरवल्ली ज़िले में इंद्रासी बांध के जलाशय के मध्य स्थित स्वयंभू भुवनेश्वर महादेव मंदिर—जिसे भवनाथ मंदिर के नाम से भी जाना जाता है और जिसे ऋषि भृगु का प्राचीन आश्रम माना जाता है—आस्था का एक प्रमुख केंद्र है। तीर्थयात्रियों की सुविधाओं के विस्तार और विरासत संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए गुजरात सरकार इस पवित्र धाम को एक उभरते धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित कर रही है। इस धाम में प्रतिष्ठित स्वयंभू शिवलिंग विराजमान है। श्रावण मास में, विशेष रूप से सोमवार के दिन, जल और दूध से अभिषेक करने के लिए हज़ारों श्रद्धालु यहां उमड़ पड़ते हैं। “हर हर महादेव” के गगनभेदी जयकारों से संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो उठता है, जो न केवल गुजरात बल्कि दूर-दराज़ से आने वाले श्रद्धालुओं को भी आकर्षित करता है और उन्हें शांति तथा दिव्य अनुभूति का अनुपम अनुभव प्रदान करता है। धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहन देते हुए गुजरात सरकार ने मंदिर परिसर में एक आधुनिक अतिथि गृह का निर्माण कराया है। व्यापक विरासत संरक्षण पहल के तहत उठाया गया यह कदम श्रद्धालुओं को अधिक समय तक ठहरने, शांत वातावरण में पूजा-अर्चना करने और गहन आध्यात्मिक शांति का अनुभव करने का अवसर प्रदान करेगा। इसके अलावा लोग मंदिर तक जाने के लिए बनाए गए रास्ते को देखकर भी हैरान और अभिभूत हैं।

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