Gujarat की Fishing Industry ने पकड़ी नई रफ्तार, फिशिंग हब के रूप में उभरता धोलाई
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विश्व मत्स्य दिवस के मौके पर गुजरात अपनी दो दशक की जबरदस्त प्रगति के साथ मछली उद्योग में एक नई पहचान बना रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जहां 2001 में गुजरात का मछली निर्यात 625 करोड़ रुपये था, वहीं आज यह बढ़कर 6,000 करोड़ रुपये से भी ज्यादा तक पहुंच गया है…. यानी लगभग 10 गुना उछाल। भारत की 2,340 किलोमीटर लंबी तटरेखा वाला गुजरात आज आधुनिक नीतियों और बेहतर संसाधनों की वजह से देश का दूसरा सबसे बड़ा मरीन फिश उत्पादक बन चुका है। पिछले चार सालों में यहां औसतन 8.56 लाख मीट्रिक टन समुद्री उत्पादन दर्ज किया गया। अंबिका नदी के किनारे स्थित धोलाई पोर्ट, जिसका निर्माण 1995 में हुआ और 2007 से फिशरीज़ विभाग इसे संचालित कर रहा है, अब मछली कारोबार का बड़ा केंद्र बन चुका है। यहां रोज़ाना सैकड़ों नावें उतरती हैं, जिससे यह क्षेत्र के सबसे सक्रिय और व्यस्त फिशिंग ज़ोन में शामिल हो गया है। स्थानीय नेताओं का कहना है कि फिशरीज़ सेक्टर की यह बढ़त सीधे तौर पर लोगों की आजीविका और सरकारी समर्थन को मजबूत कर रही है। इस साल गुजरात सरकार ने 1,622 करोड़ रुपए का बड़ा पैकेज घोषित किया है… जिसमें झींगा उत्पादन, कोल्ड स्टोरेज, केज कल्चर और फिश बाय-प्रोडक्ट प्रोसेसिंग जैसी सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया गया है। मजबूत पोर्ट, बढ़ता निर्यात और नई सरकारी निवेश... इन सबके साथ गुजरात की मरीन इकॉनमी पहले से कहीं तेज़ रफ्तार से आगे बढ़ रही है। धोलाई जैसे पोर्ट न सिर्फ परंपरागत मछुआरों की रोज़ी-रोटी को संभाल रहे हैं, बल्कि एक आधुनिक, तकनीक-आधारित फिशरीज़ सेक्टर की ओर राज्य को आगे बढ़ा रहे हैं।
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