खेतों से नेतृत्व तक: गुजरात की महिला किसान कर रही हैं बदलाव की बयार

Updated:6 months ago

गुजरात के आनंद ज़िले के इसरामा गाँव की दिव्यांग किसान सगुणा बेन ने प्राकृतिक खेती अपनाकर आत्मनिर्भरता की मिसाल कायम की है। सरकारी सहयोग से उन्होंने रासायनिक खेती छोड़ प्राकृतिक खेती शुरू की, जिसके लिए उन्हें प्रशिक्षण, शेड नेट और हल्दी पीसने की मशीन मिली। आज वे लगभग 3 बीघा भूमि पर खेती कर हर साल 5–6 लाख रुपये का मुनाफा कमा रही हैं और अन्य महिलाओं का मार्गदर्शन भी कर रही हैं। इसी तरह घोड़ा गाँव की सुदाभा ने प्राकृतिक खेती से मिर्च उत्पादन शुरू कर अपनी आय 2–3 लाख से बढ़ाकर 4–5 लाख रुपये कर ली। प्रशिक्षण, अनुदान और आधुनिक तकनीकों के ज़रिए गुजरात सरकार महिला किसानों को सशक्त बनाकर उन्हें खेती में नेतृत्व की भूमिका दे रही है।

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