गोबरधन योजना से ग्रामीण गुजरात में आया सतत परिवर्तन

Updated:8 months ago

छोटा उदयपुर (गुजरात), अक्टूबर 25 (एएनआई): गुजरात के छोटा उदयपुर जिले में बायोगैस से जीवन बदल रहा है। नानी बुमडी गाँव की दीपिकाबेन राठवा गोबर इकट्ठा करती हैं, उसे पानी के साथ मिलाती हैं और अपने बायोगैस प्लांट में डालती हैं। बचे हुए मिश्रित गोबर का उपयोग उनके खेतों के लिए जैविक खाद के रूप में होता है। गोबरधन योजना के तहत उन्हें 42,000 रुपये का बायोगैस यूनिट मिला — जिसमें 37,000 रुपये की सब्सिडी और 5,000 रुपये उनके परिवार का हिस्सा था। पहले लकड़ी और महंगे एलपीजी पर निर्भर रहने वाला उनका परिवार अब सस्ता और साफ ईंधन उपयोग कर रहा है। अब परिवार रोज़ाना के भोजन के लिए धुआँ-मुक्त, पर्यावरण-हितैषी गैस का उपयोग कर रहा है। बायो-स्लरी प्राकृतिक उर्वरक के रूप में काम कर रही है, जिससे रासायनिक उर्वरकों की खपत कम हो रही है और परिवार का खर्च भी बच रहा है।

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